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A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 4 - Sonar Kila -The Living Fort (Hindi Version)

ॐ 

Jaisalmer Durg
जैसलमेर दुर्ग 

A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 4 -  Sonar Kila -The Living Fort

  जैसलमेर  दुर्ग 


                              कभी आप में सोचा है की कैसा होगा एक सचमुच के किले में रहना जिसकी ऊंची ऊंची दीवारें हों, तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा हो, रोज़ ऊंचे ऊंचे गर्वान्वित कर देने वाले ऐसे दरवाज़ों में से निकलना जिन्होंने वर्षों तक दुश्मन को रोके रखा। कुछ ही दूर चल कर किले के ९९ गार्ड टावर में से एक पर पहुंच जाना और वहां से चारों और दूर तक फैले जैसलमेर शहर को देखना। लगता है न एक सपने जैसा। परन्तु जैसलमेर के 5000 लोगों के लिए यह एक सपना नहीं है अपितु दिनचर्या है। वह एक किले में रहते हैं, जैसलमेर दुर्ग में जो कि भारत का एकमात्र जीवंत दुर्ग है। यहाँ आज भी पांच हज़ार लोग उसी तरह से ज़िंदगी बसर कर रहे हैं जैसे उनके पुरखे किया करते थे। 

जैसमेर के किले का इतिहास 


           जैसलमेर के किले के इतिहास की व्याख्या मैं अपने एक पोस्ट में पहले ही कर चुका हूँ। इस पोस्ट को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह किला भाटी राजपूत रावल जैसल ने  ईसुल नामक दरवेश के कहने पर उस समय बसाया था, जब वह अपने भतीजे, जिसका की उसे संरक्षक नियुक्त किया गया था, से सत्ता हथियाने के बाद एक सुरक्षित राजधानी की तलाश कर रहा था। इस किले को जब प्रसिद्द निर्देशक सत्यजीत रे ने अपनी फिल्म सोनार केला में  दिखाया। यह किला जैसलमेर के पीले रंग के  पत्थर से बना है। पीले रंग का यह किला सूर्य किस स्थिति के  अनुसार रंग बदलता है। 

बनावट  

             यह किला 1500 फ़ीट लम्बा और 750  फ़ीट चौड़ा है। इसका भीतरी  घेरा 4 किलोमीटर है। इसमें तीन दीवारों का घेरा बना कर तीन स्तरीय सुरक्षा दी गया दी गयी है। इस किले में 92 बुर्ज हैं। इस किले के 04 विशाल दरवाज़े हैं और हर दरवाज़े का अपना सुरक्षा तंत्र है। अगर दुश्मन हमला करता था तो वह इन चारों दरवाज़ों को अथवा तीन दीवारों को पार कर के ही किले के अंदर पहुँच सकता था। किले के ऊपर आज भी पत्थर के गोले और बेलन रखे हुए हैं जिन्हे दुश्मन पर लुढ़का दिया जाता था। 

किले की यात्रा  

          आज हमारी यात्रा का चौथा दिन था और आज हम सबसे पहले जैसलमेर किले की यात्रा करने वाले थे। सुबह का नाश्ता होटल की तरफ से ही था जिसका प्रबंध होटल की छत पर था। नाश्ता काफी साधारण सा था जो मुझे याद भी नहीं है परन्तु वहां से किले का दृश्य असाधारण था। किला वहां से इतना बड़ा और इतना करीब लग रहा था मानों हाथ बढ़ा कर छू सकते हैं।  

                 नाश्ता करने के बाद हम किले की ओर चल पड़े। किले से थोड़ा पहले ही एक रेहड़ी पर पोहा बिक रहा था। एक जगह मैंने किसी यात्री द्वारा इसकी काफी प्रशंसा पढ़ी थी। हालाँकि हमने अभी अभी नाश्ता किया था फिर भी हमें एक प्लेट  पोहा ले लिया। 10 रुपये में हमने एक छोटी सी प्लेट ले ली और जब इसे चखा तो एक और प्लेट ले कर हम चारों ने मिल  खाया। यह आज तक का  स्वादिष्ट पोहा था।  

                         हमारा गाइड हमें किले के पास मिल गया और हम आज के पहले गंतव्य स्थान की ओर बढ़ चले। किले के अंदर के दर्शनीय स्थलों को चार भागों में बांटा जा सकता है 

1. किले की गलियों में भारत के एकमात्र आबाद किले के लोगों की ज़िंदगी देखें।
2. जैन मन्दिर 
3. दशहरा चौक में बैठ कर किले के नज़ारे 
4. राजा रानी के महल 
5. लक्ष्मी नाथ जी का मंदिर 

                     जैन मंदिर के बारे मैं अगली पोस्ट में लिखूंगा। इस पोस्ट में हम बाकी के स्थानों का भ्रमण करेंगे। गाइड से मिलने के बाद उसके साथ हम  किले के अंदर की ओर बढ़ चले। किले के भीतर तक पहुँचने के लिए हमें चारों दरवाज़ों को पार करना था। हर दरवाज़े की अपनी बनावट और विशेषता थी। 
Suraj Pole
सूरज पोल 

               सूरज पोल अथवा प्रोल जैसा राजस्थान में दरवाज़ों को कहा जाता है। इस दरवाज़े के ऊपर सुन्दर सी नक्काशी की गयी है। इसके ऊपर मुंडेर इस ढंग से बनाये गए थे कि यह किले के सिपाहियों की रक्षा करते थे और सिपाही उसके अंदर से दुश्मन पर हमला कर सकते थे। 

Ganesh Pole
गणेश पोल 

                           अगला दरवाज़ा गणेश पोल था यह दरवाज़ा सूरज पोल जितना सुन्दर तो नहीं था परन्तु किले की सुरक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। 


Drainage system at Jaisalmer Fort
जैसलमेर के किले में पानी के निकास की व्यवस्था 


                   गणेश पोल पार करने पश्चात एक पत्थरों का बना हुआ रास्ता हमें अगले दरवाज़े की ओर जा रहा था। ऊपर दिए चित्र में यह रास्ता दिखाई  देता है और इसके साथ दीवार में से निकले हुए कुछ पत्थर दिखाई दे रहे हैं। यह असल में पानी को निकालने वाली नालियां हैं। जैसलमेर में कमरों को ठंडा रखने के लिए छतों पर गारे एवं मिट्टी की मोटी परत बिछाई जाती है। अगल इन छतों पर पानी खड़ा हो जाए तो यह छतें गिर सकती थीं। इसलिए जैसलमेर किले में इस पानी और दूषित पानी के निकास के लिए एक बहुत ही प्रभावी प्रणाली "घट नाली" विकसित की गयी थी जो दूषित जल को किले से दूर ले जाती थी। 
               
Hawa Pole
हवा पोल 

                          अगला दरवाज़ा हवा पोल था। इस दरवाज़े में छता हुआ रास्ता काफी लम्बा था। इसकी बनावट के कारण इसके नीचे ठंडी हवा चल रही थी। गाइड ने बताया की इस तरह की हवा हर समय चलती रहती थी इसी कारण इसका नाम हवा पोल रखा गया था।  इस दरवाज़े के नीचे बैठे की जगह बनी हुई थी हमें वहां बैठ कर ठंडी हवा का आनंद लिया और आगे चल पड़े।

                             हवा पोल पार करने के बाद हम दशहरा चौक में पहुँच गए। इसका नाम दशहरा चौक शायद यहाँ दशहरा मनाने के कारण रखा गया होगा। 
Dussehra Chowk
दशहरा चौक 

                       यह चौक इस किले के दिल की तरह है. यहाँ पर हर समय चहल पहल रहती है चारों तरफ दुकाने हैं जो अलग अलग तरह का सामान बेचती हैं।

Raja Ka Mahal
राजा का महल 


              इसी चौक में राजा रानी का महल है। इस महल में राजा और रानी रहते थे। अब इसे एक अजायबघर बना दिया गया है। यह एक सुन्दर महल है और जैसलमेर की बाकी वैभवशाली इमारतों की तरह इसमें भी सुन्दर नक्काशी की गयी है। 

Rani Ka Mahal
रानी  का महल 

            राजा के महल का दाईं ओर का भाग जिसे रानी का महल के नाम से भी जाना जाता है।  इसके नीचे की मंज़िल पर कुछ लोग हस्तशिल्प  की वस्तुएं और चद्दरें बेच रहे थे। 
Entrance of The Raja ka Mahal.
राजा के महल का प्रवेश द्वार जिसके दोनों ओर सती  के हाथों की छाप  हैं 


             राजा के महल का प्रवेशद्वार। इसके दोनों ओर सतियों के हाथों की छाप हैं। अल्लाउद्दीन खिलजी ने सात साल तक इस किले का घेरा डाले रखा था। अंत में जब और कोई रास्ता नहीं बचा तो महिलाओं ने जौहर किया और वीर राजपूत दुश्मन की सेना पर टूट पड़े। 

Beautiful Balcony at Raja Ka Mahal - Jaisalmer Fort Jaisalmer
राजा के महल का सुन्दर झरोखा - जैसलमेर  दुर्ग - जैसलमेर 


The Royal Palace - Raja Ka Mahal
राज महल 

                      महल के अजायबघर में पुराने ज़माने के काफी वस्तुएं प्रदर्शित की गए थीं। परन्तु कोई भी वस्तु अविस्मरणीय नहीं थी। जिन दो चीज़ों ने मेरा ध्यान आकर्षित किया वह थीं चांदी का राज सिंहासन एवं भाटी राजवंश की वंशावलियाँ।  

Silver throne and the Sword
चांदी का सिंहासन और तलवार 

                    एक कमरे में एक चांदी का सिंहासन, एक राजसी तलवार एवं छत्र प्रदर्शित थे। इनका प्रयोग नए राजा के राज्याभिषेक के समय किया जाता था। गाइड के अनुसार यह वस्तुएं पांच हज़ार साल पुरानी थीं।  परन्तु मुझे इस बात पर विश्वास नहीं हुआ और न ही इसके बारे में कहीं कुछ अधिकारिक रूप से वर्णित था। 

Lineage of Jaisalmer state starting from Rawal Jaisal
जैसलमेर के राजवंश की वंशावली 


Lineage of Lord Krishna
भगवान कृष्ण की वंशावली 


Rawal Jaisal
महारावल जैसल 

         
                            एक और प्रदर्शित वास्तु जिसने ध्यान आकर्षित किया था वह थी जैसलमेर के शासकों की वंशावली। जैसलमेर के भाटी राजपूत अपने आप को कृष्ण जी का वंशज मानते हैं। वहां पर दो चित्र लगे हुए थे। एक में रावल जैसल से ले कर वर्तमान तक के शासकों को दर्शाया गया था तथा दूसरे में श्री कृष्ण जी से ले कर जैसल तक की वंशावली दी गयी थी। इन चित्रों के आगे लगे हुए शीशे पर पड़ रही रोशनी के कारण चित्र साफ़ नहीं हैं। 

view of Jaisalmer City from the top of Fort
किले के ऊपर से जैसलमेर का दृश्य 

                     इन महलों का चक्कर लगाने के बाद, हम इनकी छत पर पहुँच गए. यह जैसलमेर का सबसे ऊंचा स्थान है। यहां से दूर दूर तक जैसलमेर शहर का दृश्य दिखाई दे रहा था।  ऊपर के चित्र में किले के प्रवेश का रास्ता एवं आस पास के बाजार नज़र आ रहे हैं। 


Another view of the City
जैसलमेर का एक और दृश्य 


              शहर के दूसरी तरफ का दृश्य इस में शहर के बीचों बीच खूबसूरत छज्जों वाली सालिम सिंह के हवेली दिखाई दे रही है।  

Another view which coming down
किले से नीचे आते हुए सुन्दर झरोखे हुए जैसलमेर राज्य का झंडा 

A beautifully carved Hanging Balcony
खूबसूरत छज्जा 

   छत से नीचे उतरते हुए सुन्दर नक्काशी वाले छज्जे बहुत ही सुन्दर लग रहे थे। इन पर जाने का रास्ता अभी बंद कर दिया गया था परन्तु इस बात की कल्पना की जा सकती है कि इन में बैठ के शहर को और दूर तक फैले मरुस्थल के दृश्यों का अवलोकन  करना कितना आनंददायक होता होगा। 

                         
Map of Jaisalmer Fort
जैसलमेर दुर्ग का मानचित्र 

                   एक जगह पर पत्थर पर उकेरा हुआ जैसलमेर के किले का नक्शा रखा हुआ था। इसमें किले के भिन्न भिन्न भागों को बहुत सफाई से दिखाया गया था। 

Pillar comemorating 850 years of jaisalme
जैसलमेर के 750 वर्ष सम्पूर्ण होने का यादगारी स्तम्भ 

                  जैसलमेर 850 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक स्तम्भ स्थापित किया गया था। 

Laxmi Nath JI Mandir
लक्ष्मी नाथ जी का मंदिर 

                    महलों का भ्रमण पूर्ण करने पश्चात हम लक्ष्मीनाथ जी का मंदिर देखने के लिए चल पड़े। यह मंदिर जैसलमेर का सबसे पुराना मंदिर है एवं भगवन विष्णु तथा लक्ष्मी माता को समर्पित है। इस मंदिर में भी अत्यंत ही महीन नक्काशी का काम किया गया है। 
idols of Lord Vishnu and Goddess Lakshmi inside sanctum sanctoruof Laxmi Nath Ji Temple
गर्भगृह में भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी माता की मूर्तियां

                             मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवन विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा। इस में लक्ष्मी जी भगवन विष्णु को निहार रहीं हैं। हमारे गाइड ने इस से सम्बंधित भी एक कहानी बताई थी जो कि मैं अब भूल चूका हूँ अगर किसी पाठक को उसके बारे में पता है तो कमैंट्स में बताएं। 
Beautiful carving at Laxmi Nath ji temple
लक्ष्मी नाथजी मंदिर की सुन्दर नक्काशी 

                   मंदिर में दर्शन करने के बाद हम बाहर निकल आये। हम जैन मंदिर पहले ही देख चुके थे जिसका विवरण मैं अगले पोस्ट में करूंगा। इसके साथ ही हमारा जैसलमेर के किले की यात्रा पूरी हो गयी थी। 

Handicraft seller at Jaisalmer Fort
राजस्थानी हस्तशिल्प की दुकान 
Another view of Jaisalmer fort Entrance
जैसलमेर दुर्ग के प्रवेश का एक और चित्र 





क्रमश: .........

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