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A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 3 - The Havelis of Jaisalmer - Part 2 - Hindi version

Bikaner & Jaisalmer - Nathmal Ki Haveli
बीकानेर एवं जैसलमेर - जैसलमेर की हवेलियां 


A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 3 - The Havelis of Jaisalmer - Part 2


बीकानेर एवं जैसलमेर यात्रा - विहंगम पटवा हवेलियां 


The drawing room of Patwas
अति विशिष्ट लोगों का स्वागत इसी कमरे में किया जाता था। 


             मुनीम जी का कमरा,  जहां पर अधिकतर व्यापारिक गतिविधियां होती थीं, देखने के बाद, हम आगे बढ़े। आगे जो कमरा आया वह शायद पटवा सेठ लोग अपने कुछ अति महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात के लिए प्रयोग करते होंगे। इसमें एक चांदी का सोफा था। पूरे कमरे में दीवारों पर अति सुन्दर चित्र बने हुए थे। जिस वस्तु ने इस कमरे में हमें सबसे ज़्यादा आकर्षित किया वह थी एक बहुत ही बड़ी सी सुराही। यह सुराही लगभग सात फीट ऊंची थी। बीच में एक सुन्दर मेज़ पर पानदान और अन्य वस्तुएं थीं तथा एक खूबसरत ईरानी कालीन कमरे की शोभा बढ़ा रहा था। 

Another opulent room with floor sitting arrangement
एक अन्य वैभवपूर्ण कमरा जहाँ पर बैठने के प्रबंध फर्श पर किया गया है। 

Dressing room
श्रृंगार कक्ष 
                                आगे एक सुन्दर सा श्रृंगार कक्ष था जिसमे श्रृंगार मेज़, गहने रखने का संदूक कपड़ों के लिए पेटियां थीं।  गहने एवं चूड़ियां रखने के लिए भी विशिष्ट स्थान बना हुआ था। कमरे में बहुत सुन्दर मेहराबें थीं एवं दीवारों पर सुनहरी रंग की चित्रकारी थी।   
A beautiful roof with gold and mirror work.
पटवों की हवेली की एक खूबसूरत छत, जिसमें शीशे और सोने का काम किया गया है। 


One of the many Beautiful miniature paintings.
बहुत से सुन्दर भित्ति चित्रों में से एक 


A kerosene operated Fan
केरोसीन से चलने वाला पंखा। 


A foot operated sewing machine
पैरों से चलने वाली सिलाई मशीन। 



The courtyard with shops all around
पटवों की हवेली का आँगन। 
                    हवेली में एक बहुत सुन्दर आँगन था। उसके चारों तरफ दुकानें थीं परन्तु यह कानूनन किराये पर ली गयीं थी या जबरन कब्ज़ा कर लिया गया था यह स्पष्ट नहीं था क्यों कि ऐतिहासिक हवेली में इस तरह दुकानें किराये पर देना कुछ अटपटा सा लग रहा था। हवेली के तहखाने में जाने का रास्ता भी एक दूकान में से हो कर जाता था।इन दुकानों पर अधिकतर राजस्थानी हस्तशिल्प की वस्तुएँ तथा कपड़े बेचे जा रहे थे तथा दुकानदार पर्यटकों को लुभाने का पूरा प्रयत्न कर रहे थे। 

Another beautiful Jharokha
एक सुन्दर सा झरोखा। 

An Ornate Jain Mandir indide Patwa Haveli
पटवा हवेली के अंदर एक अत्यंत सुन्दर जैन मंदिर। 

Gold plated ceiling
सोने की परत चढ़ी छत 
                         हवेली के कमरों का चक्कर लगाने के बाद हम लोग हवेली की छत पर पहुंचे। यहाँ से जैसलमेर का किला दिखाई देता था। जब हम छत पर से जैसलमेर के किले और शहर के दृश्यों का आनंद ले रहे थे तभी वह हुआ जो जैसलमेर में दुर्लभ है - मूसलाधार वर्षा। इस वर्षा से चारों ओर का वातावरण और भी खूबसूरत हो गया। 
Jaisalmer Fort as seen from Patwa Haveli amidst rain
पटवा हवेली की छत से बारिश का दृश्य और दूर नज़र आता हुआ जैसलमेर का किला। 


It was raining heavily at Patwon ki Haveli
वर्षा में भीगती हुई हवेली का एक और दृश्य। 


Narrow Street in front of havelis after rain
बारिश के समय पटवों की हवेली के आगे की संकरी गली।  
                बारिश के बाद सब कुछ धुला धुला सा लग रहा था। ऊपर का चित्र पटवा हवेलियों के आगे की गली का है बाईं ओर पाँचों हवेलियां हैं। सबसे पहले दिखने वाली सीढ़ियां उस हवेली की हैं जिसे देख कर हम अभी अभी निकले थे।  इसी चित्र में सूर्य की रौशनी का जैसलमेर के पीले पत्थरों पर असर दिखाई देता है। जहाँ जहाँ सूर्य की रौशनी पड़ रही है वहां पर पत्थर सोने की भांति चमक रहे हैं।   
Frontal view of another haveli
एक अन्य हवेली के सामने का चित्र 
                       जिस हवेली को हम देख कर निकले थे उसके साथ वाली हवेली का दृश्य।इस हवेली के सामने का मकान सरकार ने खरीद कर गिरा दिया और वहां  पर अब सिर्फ खाली जगह है जिसका फर्श पक्का कर दिया गया है और कुछ बेंच लगे हैं ताकि पर्यटक वहां बैठ कर हवेली की सुंदरता को निहार सकें। 

                          हमने पटवों की हवेली देख तो ली थी परन्तु वहां से जाने का मन नहीं हर रहा था।  मन कर रहा था मानों बस इस खूबसूरत कलाकृतियों को बस निहारते रहें। अभी भी हमारा सर उन गुमनाम कारीगरों के प्रति सम्मान में झुक रहा था जिन्होंने यह अत्यंत सुन्दर हवेलियां बनाईं। इसके साथ साथ पटवा सेठों की वैभवपूर्ण जीवन शैली एवं दूरगामी सोच हैरान कर रही थी।  यहां  वस्तुएं टाइपराइटर, कैमरा, फ्रिज, पंखा अत्यंत मामूली वस्तुएं लगती है परन्तु पटवा सेठ लोग इनका प्रयोग दो सौ से अधिक साल पहले कर रहे थे। यह उनकी आधुनिकतम तकनीक को अपनाने की चाहत को इंगित करते हैं। 

                                 इसके बाद हमें मन मंदिर पैलेस, ताजिया टावर और नथमल जी की हवेली देखने जाना था।  इसका वर्णन अगले लेख में करूंगा। 

क्रमशः

A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 1 - Prologue
A Tryst with Royalty - Bikaner and Jaisalmer - Day 1- Ludhiana to Bikaner
A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 1 - Karni Mata Mandir
A tryst with Royalty - Bikaner and Jaisalmer - Day 1 - Camel Research Farm , Royal Cenotaps
A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 2 - Laxmi Niwas Palace
A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 2 - Junagarh Fort - Part 1
A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 3 - Jaisalmer Saga continues
A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 4 - Sonar Kila - The living Fort  ( Hindi Version )
A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 4 - Sun and Sand
A Tryst with Royalty - Bikaner & Jaisalmer - Day 5 - The Border Run                       

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