Srikhand Mahadev Yatra - A trip to heaven and Back - Day 6 - The Homecoming ( Hindi Version )

पार्वती बाग में हमारा टैंट 

श्रीखंड महादेव यात्रा - स्वर्ग सरीखी यात्रा - दिवस ६ - घर वापिसी 

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   कल का दिन बहुत ही उतार चढ़ाव वाला था। पहले एक थका देने वाली चढ़ाई उसके उपरांत एक सुन्दर दृश्यों से भरी शाम ,परन्तु सब से अच्छी थी एक संतुष्टि भरी रात की नींद। सुबह ४:३० पर अलार्म ने उठा दिया।बाहर अभी अँधेरा था। कुछ और देर रजाई की गर्माहट का आनंद लेने के बाद मैं बाहर निकला। नित्य कर्म से निवृत हो कर ठन्डे पानी से मुँह हाथ धोया। पौ फट चुकी थी।  चारों तरफ फैली हरियाली की चादर एक अविस्मरणीय दृश्य प्रस्तुत कर रही थी। हमने सारा सामान बैग में डाल  लिया था पर इस सुन्दर जगह से जाने का मन नहीं कर रहा था। यहाँ पर ब्रह्म कमल बहुतायत में खिलते हैं।काफी देर हम ब्रम्ह कमल को ही निहारते रहे। इन्हें तोड़ना वर्जित था। ये थे ही इतने सुन्दर की कोई इन्हें कैसे तोड़ सकता था। कुछ देर बाद हम चल पड़े। 

                     थोड़ी ही देर में हम लोग नीचे की तरफ उतर रहे थे। आज हमें काफी लोग ऊपर आते हुए मिले। शायद यह कल यात्रा स्थगित होने के कारण था। आज जो लोग हमें मिल रहे थे वह अधिकतर शहरी लोग थे जबकि पिछले दिनों जो लोग मिल रहे थे वह अधिकतर पहाड़ी लोग थे। पिछले कुछ दिनों हुई बारिश के कारण पार्वती बाग की चिकनी मिट्टी बहुत ही फिसलन भरी हो थी। परन्तु आज मैं एक बार भी नहीं फिसला था शायद यह पिछले कुछ दिनों के अनुभव का परिणाम था। फिसलन होने के कारण ऊपर आने वाले लोग घास और सुन्दर फूलों की बगिया पार्वती बाग को रौंदते हुए चल रहे थे। इस तरह इतना सुन्दर  उपवन नहस तहस होते हुए देख कर दिल पर छुरी चल रही थी पर मैं  कुछ कर नहीं पा रहा था। 

                     शीघ्र ही हम लोग भीम द्वार पहुँच गए। जाते समय हम जिस ढाबे में रुके थे हमने उसे पैसे नहीं दिए थे क्यों  कि हम मुँह अँधेरे चल पड़े थे और पुकारने पर भी ढाबा वाला नहीं उठा था।  सबसे पहले हम उस ढाबे में गए  और उसका हिसाब चुकता किया। सुबह से हमने कुछ नहीं खाया था और भूख लग आयी थी।  एक ढाबे पर हमने आलू के परांठों का नाश्ता किया और आगे बढ़ चले। भूख के कारण साधारण से परांठे भी स्वादिष्ट लग रहे थे। 

Treacherous path in Srikhand Mahadev Yatra
पत्थरों और बहते पाने के बीच खड़ी उतराई 


Flowing water makes the climb difficult
बहता पानी उतराई को और भी कठिन बना देता है 

               पार्वती बाग से भीम द्वार तक रास्ता फिसलन भरा था परन्तु भीम द्वार के बाद चढ़ाई शुरू हो गयी थी और रास्ता भी मुश्किल और पथरीला हो गया था। परन्तु रास्ता जैसा भी था उस पर चलना ही था।  पिछले दिनों की वर्षा के कारण सब कुछ धुला धुला सा और बहुत सुन्दर लग रहा था। नालों और छोटे छोटे झरनों में पानी बढ़ गया था और कई छोटे छोटे नए झरने उत्पन्न हो गए थे।
beautiful waterfalls enroute Srikhand Mahadev Yatra
श्रीखंड महादेव यात्रा में एक सुन्दर झरना 

                    जाते समय  हमने कुनसा के पास एक ढाबे पर एक बैनर देखा था जिसमें वह मोमोज़ के साथ सेब की चटनी दे रहा। अब हम उस ढाबे को ढूंढ रहे थे क्योंकि एक तो मोमो और सेब की चटकी का मेल पहली बार सुना था दूसरा कई दिनों से दाल चावल खा के पक चुके थे। जब हमें ये ढाबा मिला तो हमने झट से मोमो का आर्डर दे दिया।  जब तक मोमो तैयार होते हम आस पास  के  दृश्यों का आनंद लेने लगे।

Dhaba serving awesome food
कुनसा का यह ढाबा जो स्वादिष्ट खाने के कारण सदा याद रहेगा  

                       जाते समय फूल अपने पूरे यौवन पर थे परन्तु अब वर्षा के कारण हरियाली ने अपना अधिपत्य जमा लिया था। हमने कुछ फोटो खींचे और फिर कुछ देर आराम किया।  इतने में हमारे मोमोज़ तैयार हो गए। हमने फ्रूट चाट का आर्डर भी दे दिया।  दोनों ही चीज़ें बहुत स्वादिष्ट थीं।  फ्रूट चाट के अंदर ताज़ा धनिये और पुदीने की खुश्बू और खट्टे मीठे सेबों का स्वाद लाजवाब था।
A random flower in the valley of Flowers
फूलों के वादी में एक सुन्दर फूल 


Beautiful vistas all around
प्रकृति की अतिसुन्दर छटा
Valley of Flowers, but the green is dominating the flowers
फूलों की घाटी में हरे रंग ने अपना अघिपत्य जमा लिया 

There were other spectators also watching the verdant surroundings
सुन्दर  आनंद उठाने वाले हम अकेले ही नहीं थे

                         पेट पूजा के बाद अब समय था आगे बढ़ने का।


Walking on glaciers is dangerous but Fun also
ग्लेशियर पर चलना मज़ेदार भी है और खतरनाक भी 

Glacier from a distance.
कुनसा ग्लेशियर और उस पर चले जाते लोग 


 थोड़े देर में हम कुन्सा ग्लेशियर तक पहुँच गए। पिछले  दिनों में  काफी बर्फ पिघल  गयी थी और एक बड़ा सा छेद हो गया था। ग्लेशियर के दूसरी तरफ पहाड़ दरकने से रास्ता लगभग बंद  था और बहुत खतरनाक हो गया था। हमने बहुत सावधानी से इस हिस्से को पार किया।


                   काली टॉप पहुँचने पर फिर से बूंदा बांदी शुरु हो गयी। हमने पोंचो निकाल लिए परन्तु कुछ ही दूर चलने के बाद बारिश रुक गयी


A random Flower shot
मनमोहक फूल बरबस ही अपनी तरफ ध्यान खींच लेते हैं 

                      हमारा अगला पड़ाव थाचड़ू था। मैं सबसे पहले मेडिकल टेंट में गया। कुछ दिनों से लगातार बैग उठाने और न नहाने से पीठ पर हल्के घाव हो गए थे। मरहम पट्टी के बाद हम लोग लंगर में गए। लंगर में खाना कुछ देर के लिए बंद कर दिया  गया था। परन्तु उन्होंने हमें रसोई में बुलाया और दाल चावल खिलाये। इसके बाद मैंने चाय पी और रस्क खाये। पता नहीं क्या वजह थी पर उस चाय और रस्क का स्वाद मैं आज तक नहीं भूल पाया हूँ.

                                          थाचड़ू के बाद लगभग उतराई ही थी।  परन्तु उबड़ खाबड़ रास्तों और रास्ते पर निकली हुई पेड़ों की जड़ों की वजह से चलने की गति बढ़ नहीं पा रही थी।  उतराई  होने के कारण हमें बार बार रुकना नहीं पड़ रहा था जो की हमें चढ़ाई  के समय करना पड़ा था। हमारा आज का लक्ष्य बाराती नाला था जहाँ हमने अपना बैग छोड़ा था।
Tree roots are a big damper for speed
पेड़ों की जड़ों की वजह से चलना बहुत कठिन हो जाता है 

                   परन्तु हम अभी नाले से काफी दूर थे जब सूर्य अस्त हो गया। हम रास्ते में रुकने के बारे में सोच भी नहीं रहे थे। अँधेरे मैं चलना काफी खतरनाक था क्योंकि हमारे पास एक ही छोटी सी माथे पर पहनी जाने वाली टॉर्च थी और उसी रौशनी अप्रयाप्त थी। आज मुझे एक बड़ी टॉर्च का महत्त्व समझ आ रहा था।

                       जिस ढाबे पर हमने बैग छोड़े थे हमें उस ढाबे का अंदाज़ सा था इसलिए हमें डर लग रहा था की कहीं हम उस ढाबे से आगे न निकल जायें  परन्तु हम नहीं निकले।  जब हम उस ढाबे पर पहुंचे तो वह लड़की जिसके पास हमने बैग छोड़ा था  नहीं थी बल्कि एक दम्पति थे।  पूछने पर पता चला कि वो उनकी बेटी है।  हमने अपना बैग लिया और ढाबे वाले से रुकने के बारे में पूछा। उसने हमें एक बहुत बड़ा सा टेंट और काफी सारे कम्बल दे दिए।  हमने सबसे पहले ढाबे से पानी ले कर अपने चिपचिपे शरीर को जितना हो सका उतना साफ़ किया और कपडे बदले।  यह एक बहुत बड़ी राहत थी। खाने में काले चने और आलू की सब्ज़ी और गरमा गर्म  चपाती थी। बहुत दिनों बाद चपाती मिलने से मज़ा ही आ गया।

                  सुबह ४:३० का अलार्म बजा और हम उठ गये और फटा फट तैयार हो गए। ढाबे वाले का हिसाब हमने रात को ही निपटा दिया था।  सुबह एकदम तारो ताज़ा थे इसलिए हम तेज़ी से चल रहे थे।  बाराती नाला और सिंहगाड़ के बीच में कुछ लंगर थे और मैंने एक जगह चाय पी। सिंहगाड़ में काफी सारी छोटी छोटी दुकाने सज गयी थीं जो प्रसाद, माला, शिव जी की फोटो वाली टीशर्ट बेच रही थीं।  तेज़ी से चलते हुए हम जाओं पहुँच गए। यहाँ पहुँच कर हमने नाश्ता किया।

                             पिछले कुछ दिनों से हमारा सम्पर्क बाहरी दुनिया से कटा हुआ था।  यहाँ मोबाइल सिग्नल आने पर हमे घर पर और कुछ और लोगों से बात की।  इसके बाद कुछ प्रतीक्षा के बाद हमें रामपुर के लिए टैक्सी मिल गयी।  रामपुर पहुँच कर हमने बस का पता किया तो सिर्फ रात की बस ही ठीक बैठ रही थी।  मैंने रात की बस में चंडीगढ़ की दो टिकट बुक कर दी और हमने एक बढ़िया  होटल में कमरा ले लिया। मैं काफी देर तक नहाता रहा और साफ़ कपडे पहन कर एक नए जन्म जैसा लग रहा था। उसके बाद हमने पास के एक रेस्टोरंट में खाना खाया और कुछ देर के लिए सो गए।

                              शाम को हम बस के समय से काफी पहले ही पहुँच गए। यहाँ हमें काफी लोग मिले जो श्रीखंड  महादेव यात्रा पर आये थे परन्तु यात्रा स्थगित होने के कारण अथवा न चढ़ पाने के कारण शिखर तक नहीं जा पाए।  मैंने प्रभु का मुझे अपने दर्शनों से कृतार्थ करने के लिया धन्यवाद किया।  अगले दिन हम सुबह चंडीगढ़ पहुँच गये  जहाँ से ज्योत्स्ना ने पटियाला के लिए हुए मैंने लुधियाना के लिए बस ली।  इस तरह हमारी श्रीखंड महादेव यात्रा संपन्न हुई।



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